22 साल की छोरी ने कर दिया कमाल, पेरिस में लहरा दिया तिरंगा भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया -
हरियाणा के छोटे से गांव की छोरी का धमाका देख दुनिया ने किया सलाम भगवान कृष्ण के बताएं रास्ते परचली मनु और देश को दिला दिया पहला पदक? कह सकते हैं आज से 9 महीने पहले तक मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल की भारतीय टीम में शामिल नहीं थी। बीते वर्ष एशियाई खेलो में खेली लेकिन इस इवेंट में टीम का हिस्सा नहीं थी।
यह इवेंट इनका दिल के बहुत करीब है एशियाई खेलों से पहले मनु भाकर ने पिछले साल विवादों को भूलकर मनु भाकर ने जसपाल कोच का हाथ थामा तो इसकी एक वजह से 10 मीटर एयर पिस्टल में अपना पर्भुतव् स्थापित करना था एशियाट के बाद मनु और जशपाल के साथ में काम करना काम आ गया हैं।
मनु ने सिर्फ़ 10 मीटर एयर पिस्टल की ओलंपिक टीम में अपनी जगह बनाई बल्कि भारत के लिए पेरिस ओलंपिक का पहला मेडल भी जीत लिया। 22 साल की मनु भाकर ने 10 मीटर एयर इवेंट में अपने कुछ विरोधियों को पैसे करते हुए मनु भाकर ने ब्रॉनज़ पदक जीत लिया हैं और इतिहास रच दिया है।
मनु भाकर ओलंपिक में भारत के लिए शूटिंग में पहला मैडल जीतने वाली महिला खिलाड़ी बन गई है इससे पहले ओलंपिक के इतिहास में भारत के चार ही मेडल शूटिंग में आए थे। और वह सभी मैडल पुरुष खिलाड़ी ने हासिल किए थे जिसमें पहला मेडल साल 2004 में राजवर्धन सिंह राठौर ने जीता था 2008 में अभिनव इंद्रा ने जीता था और इसके बाद लंदन ओलंपिक में गगन नारंग और साथ में में विजय कुमार ने मैडल जीता था।
कौन थे वे पुरुष जिसने पहले शूटिंग मैडल जीते थे?
पहला मैडल 2004 में राजवर्धन सिंह राठौर ने जीता था।
दूसरा मैडल 2008 में अभिनव इंद्रा ने जीता था।
लंदन ओलंपिक
तीसरा मैडल गगन नारंग ने जीता था।
चौथा मैडल विजय कुमार ने मैडल जीता था।
मनु भाकर इस बार यह मैडल जीत कर एक नया रिकॉर्ड बना दिया। हरियाणा के इज्जर के छोटे से गांव गुरिया से तालुक रखने वाली मनु भाकर ने अपने करियर के दोरान कई सारे खेलों में हिस्सा लिया हैं मनु कभी कबड्डी के मैदान में उतरी तो कभी कराटे हाथ में अजमाया। मनु 16 साल की उम्र में 2018 में आईएसएसएफ विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
और 2 स्वर्ण पदक अपने नाम के किए और इसी साल मनु ने राष्ट्रमंडल खेलों में युथ ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया और दोनों प्रतियोगिता में मनु ने पदक अपने नाम किया। मनु के पिता रामकिशन भाकर ने उनका हमेशा साथ दिया जिस खेल में उन्हें आगे बढ़ने का मन था। उसी खेल में बढ़ने दिया बहुत से विद्यार्थियों की तरह मनु भी नौंवी कक्षा में डॉक्टर बनना चाहती थी। वह खेल के साथ पढ़ाई में भी शुरुआत से अच्छा खासा ध्यान रखती थी।
दसवीं में मनु का जीवन अलग मोड पर आया जब कक्षा टॉप करने के साथ है उनका चयन शूटिंग के लिए राष्ट्रीय टीम में हुआ। कोच अनिल जाखड़ के कहने पर मनु ने शूटिंग को एक और मौका दिया। 11वीं कक्षा में जब वह 16 साल की थी तब मनु ने राष्ट्रीय टीम ओलंपिक में सोल्ड पदक जीता। मनु के पिताजी ने अपनी बेटी के करियर के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। और इसके पिताजी का ध्यान मनु की सारी तैयारी करने में लगा था। मनु भाकर ने अपनी सारी तैयारी दावों को लगाकर अपने आगे नाम कमाने के लिए भारत के गर्व के लिए आगे बढ़ती रही जिसमें वह सफलतापूर्वक जीत गई।
दबदबा अपना सीना चौड़ा करने में नहीं बल्कि दबदबा 140 करोड़ देशवासियों का सीना चौड़ा कर देने में है। आज कल की लड़कियों को इनसे बहुत कुछ सीखना चाहिए जो अपना सीना चोडा करने में लगी है। अभी तो मेडल इस देश के खिलाड़ी जीत रहे हैं मगर हम सबने पिछले दिनों इन्हीं खिलाड़ियों को जातियों में बंधते देखा था ।पहलवान बेटियों को जाति देखकर उनके हक़ के लिए समर्थन और टारगेट किया गया था...!!
पेरिस ओलंपिक को जीतने वाली भारत की महिला -
600 में से 580 पॉइंट हासिल कर मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में गोल्ड मेडल के लिए कल 3.30 बजे होगा मुकाबला पिस्टल में खराबी के कारण 2020 ओलंपिक में पदक से चूक गई थी मनु, अबकी बार मेडल लाने का सुनहरा मौका मिला हैं। जो मनु ने हासिल कर दिखाया है। #ManuBhakar भारत की पहली खिलाड़ी बनी जिसने एक ओलंपिक में दो मेडल लिए। भारत के लिए एक और कांस्य पदक जीता हैं। मनु को इस ओलंपिक पदक जीतने की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं
धन्यवाद



